
इस लोकसभा चुनाव में हर वर्ग लगता है सरकार से खफा है इसका सीधे-सीधे उदाहरण के तौर पर देखा जा सकता है कि लोकसभा चुनाव का जनता के द्वारा बहिष्कार करना साफ दर्शाता है की आम जनता शायद सरकार से नाराज है एक और भारतीय जनता पार्टी 400 पर का नारा लेकर मैदान में है वहीं मुख्य प्रमुख कांग्रेस पार्टी उत्तराखंड की पांचो लोकसभा सीट जीतने का दावा कर रही है यह तो आने वाला समय ही बताएगा ऊंट किस करवट बैठेगा लेकिन इतना साफ है कि सत्ता रूढ़ पार्टी से प्रदेश की जनता खफा है यही कारण है कि चकराता सहित इस बार 25 स्थानों में चुनाव का बहिष्कार किया गया ऐसा भी नहीं है कि चुनाव का बहिष्कार पहली बार हो रहा हो इससे पिछले लोकसभा चुनाव में भी 10 स्थान पर चुनाव का बहिष्कार हुआ था लेकिन यह आंकड़ा इस बार दुगने से भी अधिक हुआ है यह एक गंभीर विषय है अगर सरकारों से जनता इसी तरह नाराज नजर आई तो लोकतंत्र के क्या मायने रह जाएंगे और इस पर भी गौर करना जरूरी होगा कि मत प्रतिशत में इतनी गिरावट क्यों आई ऐसे तो लोकतंत्र को मजबूती देना शायद संभव नहीं होगा और आम जनता दबाव में रहकर सिमट जाएगी इतना काम मत प्रतिशत से राजनीतिक पार्टियों के माथे की चिंताएं साफ देखी जा सकती हैं उसके बाद भी हर दल अपनी मजबूती का दावा ठोकते नजर आ रहे हैं बात करें जनता के गुस्से की तो वह अपनी जगह जायज है प्रदेश के चार जिलों में बुनियादी सुविधाएं न मिलने से नाराज होकर ग्रामीणों ने मतदान नहीं किया इस कारण आज हम 15 साल पीछे के आंकड़े पर आकर सिमट गए जबकि चुनाव आयोग का 75% मतदान का लक्ष्य था मगर 56% पर यह आंकड़ा अटक गया






