
प्रयागराज के महाकुंभ में अनेकों साधु-संत पहुंचे हैं। इन्हीं में कईयों को ‘नागा संन्यासी’ भी बनाया जा रहा है। जहां नागा बनने की इसी कड़ी में 24 साल के एक युवक का नाम भी शामिल है। युवक का नाम शुभम मिश्रा बताया जाता है। मनचाहा चाहा प्यार और सरकारी नौकरी न मिलने के चलते आखिर में शुभम ने संन्यास का रास्ता अख़्तियार कर लिया और नागा बनने का फैसला किया। अब शुभम जूना अखाड़े के करीब 500 नागा संन्यासियों के साथ नागा बनने की प्रक्रिया में शामिल हो गए हैं।
घर में रहकर 10 लोगों को मारने से अच्छा, खुद को मार लो
बीए ग्रेजुएशन तक पढ़े और ‘नागा संन्यासी’ बन रहे शुभम मिश्रा ने बातचीत करते हुए बताया कि, हमारा प्यार हमको नहीं मिला। इसके बाद जब सरकारी नौकरी लेने चाही तो वो भी नहीं मिली। हम सरकारी नौकरी के लिए काफी परेशान रहे। जिससे जीवन में भी परेशानी बढ़ती जा रही थी। घर में रहते तो 10 लोगों को जरूर मार देते तो 10 लोगों को मारने से अच्छा है कि खुद को ही मार लो। इसलिए संन्यास की राह चुन ली है और नागा संन्यासी बन रहा हूं। अब यहां से वापस लौटने का कोई रास्ता ही नहीं है।
अग्निवीर स्कीम का जिक्र
नागा बन रहे शुभम मिश्रा ने बातचीत में अग्निवीर स्कीम का भी जिक्र किया। शुभम ने कहा कि, अग्निवीर स्कीम आने से उनकी सरकारी नौकरी पाने की कोशिश और फेल हो गई। वहीं थक हारकर प्राइवेट नौकरी भी की। फिलहाल, बीए ग्रेजुएशन करने के बाद भी नौकरी न मिलने से हताश शुभम ने आखिर में नागा बनने का रास्ता चुना। शुभम का कहना है कि, अपनी पूरी ज़िंदगी, अपने मां-बाप और भाई-बहन सबका त्याग कर देने के बाद अब वो सिर्फ भगवान की सेवा करेंगे। ये जीवन ज्यादा अच्छा लग रहा है।


