
प्रयागराज में अक्षयवट वृक्ष: इतिहास, धार्मिक महत्व और वर्तमान स्थिति
प्रयागराज में अक्षयवट वृक्ष का महत्व और हालिया घटनाएँ
प्रयागराज स्थित अक्षयवट वृक्ष हिंदू धर्म में अत्यधिक पवित्र माना जाता है। यह वट वृक्ष प्राचीन काल से ही श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र रहा है।
इतिहास और धार्मिक महत्व:
अक्षयवट का उल्लेख प्राचीन ग्रंथों में मिलता है, जहाँ इसे अमरता का प्रतीक माना गया है। कहा जाता है कि त्रेतायुग में भगवान राम ने वनवास के दौरान इस वृक्ष के नीचे विश्राम किया था। इसके अलावा, यह वृक्ष प्रलय और सृष्टि के साक्षी के रूप में भी जाना जाता है।
मुगल काल में अक्षयवट:
मुगल सम्राट अकबर ने इस वृक्ष के नीचे आत्महत्या की प्रथा को बंद कर दिया था और इसे किले के भीतर बंद कर दिया था। इसके बाद, जहांगीर और औरंगजेब ने भी इस वृक्ष को नुकसान पहुँचाने का प्रयास किया, लेकिन यह फिर भी जीवित रहा।
आधुनिक समय में अक्षयवट:
स्वतंत्रता के बाद, अक्षयवट को आम जनता के लिए खोलने की मांग उठी। 2018 में तत्कालीन रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण और सीडीएस जनरल बिपिन रावत ने मंदिर का निरीक्षण किया और 10 जनवरी 2019 को इसे आम जनता के लिए खोल दिया गया।
महाकुंभ 2025 में अक्षयवट का महत्व:
महाकुंभ 2025 के दौरान, अक्षयवट का विशेष महत्व है। श्रद्धालु त्रिवेणी संगम में स्नान के बाद अक्षयवट की पूजा करते हैं, जिससे उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है। मकर संक्रांति, बसंत पंचमी और माघ पूर्णिमा जैसे शुभ दिनों पर अक्षयवट की पूजा का विशेष महत्व होता है।
अक्षयवट कॉरिडोर का निर्माण:
महाकुंभ 2025 के दृष्टिगत, अक्षयवट कॉरिडोर का निर्माण अंतिम चरण में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 दिसंबर 2024 को इसका उद्घाटन करेंगे, जिससे श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएँ मिलेंगी।









