

पछवा दून विकास समाचार ने प्रमुखता से एक खबर छपी थी खबर का असर देखने को मिला पिछले दिनों पछवा दून विकास समाचार पत्र में प्रेम नगर क्षतिग्रस्त पुल के विकल्प के तौर पर अस्थाई पुल से गुजरने वालों का हाले दिल बयान किया था इसके बाद नियमित तौर पर जल छिड़काव दो टाइम सुबह और दोपहर हो रहा है धूल से होने वाली रहागीरों की परेशानी को देखते हुए हो रहा है वैकल्पिक मार्ग पर एक-एक फीट के गॾडें हो गए थे उन पर अब टाइल लगाकर भर दिया गया है इस बाबत एस ओ प्रेम नगर कुंदन राणा ने बताया कि प्रेम नगर अंडरपास से हाईवे वाले रास्ते को भी खुलवा दिया गया है जिससे आम पब्लिक को कठिनाइयों का सामना न करना पड़े यातायात सुचारू रूप से चलता रहे किसी को भी जाम स्थिति से जूझना ना पड़े ऐसी व्यवस्था हम लोगों के द्वारा की जा रही है
है कोई पछवा दून वासियों की शुद्ध लेने वाला

देहरादून नंद की चौकी के पास टोंस नदी अस्थाई मार्ग हो या हाईवे से देहरादून जाने वाला मार्ग पर एक एक फीट गहरे गड्ढे होने के कारण छोटी कारें बन रही है कबाड़ 15 सितंबर को आई आपदा में प्रेम नगर जाने वाला पुल पूरी तरह तबाह हो गया था आनंद-फानन में अस्थाई पल तैयार किया गया था जो कि दोबारा टूट गया था जिसे फिर तैयार किया गया दूसरा रास्ता देहरादून जाने वालों के लिए हाईवे से कैरी गांव होते हुए देहरादून जाने का है। मगर जो अभी पूरा बनाकर तैयार नहीं हुआ उसे मार्ग में भी गहरे गहरे गड्ढे है रोजाना इस मार्ग से आने जाने वालों का बुरा हाल है एक कर चालक से जब बात करी गई तो उसने पछवा दून संपादक से हाले दिल बयां किया और कहा मैं रोजाना अपने काम से देहरादून से विकास नगर जाता हूं मेरे पास छोटी गाड़ी है जिसकी मुझे हर हफ्ते एलाइनमेंट करवानी पड़ती है गाड़ी का अंजर पंजर हिल जाता है संबंधित विभाग जब तक मार्ग बनकर तैयार नहीं होता इसी मार्ग पर अगर मिटटी डलवा दे जिससे गड्ढे भर जाएंगे और गाड़ी स्वामियों को आर्थिक परेशानी से छुटकारा मिल जाएगा इसी प्रकार एक रोजाना इस मार्ग से गुजरने वाली महिला का कहना है कि मैं एक प्राइवेट स्कूल में अध्यापिका हूं हम सरकार को सब टैक्स देते हैं और सुविधा के नाम पर हमें क्या मिल रहा है इन दोनों मार्ग पर पानी का छिड़काव भी अगर दिन में एक दो बार हो जाए तब भी काफी राहत मिलेगी दो पहिया वाहन चालकों का इस मार्ग में सफर करने का फायदा ही फायदा है उन्हें क्रीम पाउडर खरीदे बिना ही उनका फ्री में मेकअप हो जाता है जब वह घर से निकलते हैं तो 30 से40 ग्राम धूल उनके चेहरे पर चार चांद लगा देती है साथ ही दमें की बीमारी की पूरी गारंटी भी इन्हें इस मार्ग से गुजरने पर मिलती है अरे और क्या चाहिए भाई इस बारे में जब पछवा दून विकास समाचार संपादक रवि अरोड़ा ने मेडिकेयर हॉस्पिटल सेलाकुई के डॉक्टर भोपाल सिंह बिष्ट से बात करी तो उनका कहना है कि धूल से श्वास रोगी को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है उन्हें ऐसी जगह जाने से बचना चाहिए अगर जाना जरूरी हो तो मास्क लगाकर जायें धूल मिट्टी से खांसी डैम में जैसी बीमारियों का होना स्वाभाविक है यहां तक की ऐसी स्थिति में अस्पताल में भी भर्ती होना पड़ सकता है

