


विकासनगर। उत्तरांचल पंजाबी महासभा, पछवादून की एक महत्वपूर्ण बैठक 12 अगस्त (बुधवार) को शाम 6 बजे आयुष होटल, बाजार सेलाकुई में आयोजित की जाएगी। बैठक में आगामी 14 अगस्त को मनाए जाने वाले विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस को लेकर विशेष रूप से चर्चा की जाएगी। 14 अगस्त को देशभर में 1947 के विभाजन के दौरान जान गंवाने और विस्थापित हुए लोगों के संघर्ष एवं पीड़ा को स्मरण किया जाता है।
उत्तरांचल पंजाबी महासभा द्वारा इस अवसर पर बस के माध्यम से हरिद्वार जाकर 1947 के विभाजन के दौरान बलिदान हुए पंजाबी समाज के लोगों एवं अन्य दिवंगत आत्माओं को श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी। महासभा का मानना है कि विभाजन के दौरान हमारे समाज के असंख्य लोगों ने अपने प्राणों का बलिदान दिया और अनेक परिवारों को अपना घर-बार, जमीन-जायदाद और अपनी जन्मभूमि छोड़कर भारत आना पड़ा।
महासभा के पदाधिकारियों का कहना है कि विभाजन के दौरान मारे गए अनेक लोगों को अंतिम संस्कार और विधिवत श्रद्धांजलि तक नहीं मिल सकी। ऐसे में हरिद्वार जाकर उनकी स्मृति में श्रद्धांजलि अर्पित करना और उनकी आत्मिक शांति के लिए प्रार्थना करना समाज की जिम्मेदारी है।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य केवल अपने बुजुर्गों को श्रद्धांजलि देना ही नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी को अपने इतिहास और अपने पूर्वजों के संघर्ष से परिचित कराना भी है। बच्चों और युवाओं को बताया जाएगा कि 1947 के विभाजन के समय पंजाबी समाज के लोगों ने किन कठिन परिस्थितियों का सामना किया तथा अपने परिवारों, संस्कृति और देश के लिए कितना बड़ा त्याग और बलिदान दिया। महासभा का प्रयास रहेगा कि नई पीढ़ी अपने बुजुर्गों के संघर्ष, साहस और विरासत को जाने और उसे आगे बढ़ाए।
बैठक में संगठन के विस्तार, आगामी सामाजिक कार्यक्रमों तथा समाजहित से जुड़े विभिन्न विषयों पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा।
बैठक में उत्तरांचल पंजाबी महासभा के प्रदेश एवं गढ़वाल मंडल के वरिष्ठ पदाधिकारी विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे। इनमें गढ़वाल अध्यक्ष श्री बलदेव जी, गढ़वाल महामंत्री श्री गोविंद मोहन जी, जिला अध्यक्ष देहरादून श्री पंकज दीदान जी, प्रदेश संगठन मंत्री श्री जी. एस. आनंद जी, प्रदेश कोषाध्यक्ष श्री कोचर जी तथा गढ़वाल संगठन मंत्री श्री दीपक अरोड़ा जी प्रमुख रूप से शामिल हैं।
महासभा ने पछवादून क्षेत्र के सभी सम्मानित सदस्यों एवं पदाधिकारियों से बैठक में अधिक से अधिक संख्या में समय पर पहुंचने की अपील की है, ताकि संगठन को मजबूत करने के साथ-साथ विभाजन की त्रासदी में अपने प्राण गंवाने वाले बुजुर्गों को सम्मानपूर्वक याद किया जा सके और उनके बलिदान की गाथा आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाई जा सके।
उत्तरांचल पंजाबी महासभा का संदेश है—
“अपने बुजुर्गों के बलिदान को नमन करें, इतिहास को याद रखें और आने वाली पीढ़ी को अपनी विरासत से जोड़ें।”

