


वरिष्ठ भाजपा नेता एवं डाकपत्थर डिग्री कालेज के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष विपुल अग्रवाल ने कहा कि हमारे दौर में छात्रसंघ चुनावों में होती थी खूब रौनक। उन्होंने कहा कि जब 2002 में वो छात्रसंघ अध्यक्ष बने थे वह समय छात्र राजनीति का वो दौर था जब चुनावों से महीनों पहले ही सड़कों से लेकर कॉलेज तक पोस्टर – बैनरों से क्षेत्र में रौनक बढ़ जाती थी और छात्र- छात्राओं में चुनावों के प्रति एक उत्साह एवं जोश नजर आता था लेकिन अब मिजाज पहले से बहुत ज्यादा बदल चुका है। छात्रसंघ चुनावों में जो रौनक और राजनीतिक सरगर्मी रहती थी वो चमक आज के दौर में कहीं खो गई है।
भाजपा नेता विपुल अग्रवाल ने कहा कि उस समय कॉलेज की दीवारों पर लगे पोस्टर, नारों की गूंज, ढोल-नगाड़ों की थाप और युवाओं का जोश लोकतंत्र की इस पहली सीढ़ी को एक उत्सव का रूप दे देता था। लेकिन आज के बदलते दौर में छात्र राजनीति का वह पुराना मिजाज और उत्साह सन् 2005 के बाद पूरी तरह से फीका पड़ चुका है। दो दशक बाद आज के दौर के छात्र नेता सिर्फ बड़े नेताओं के पिछलग्गू बनकर रह गये हैं। छात्र-आंदोलन भी कहीं खो गये हैं।
विपुल अग्रवाल ने कहा कि दो दशक पूर्व हमारे दौर में शासन -प्रशासन पर छात्र नेताओं का दबदबा देखते ही बनता था। उन्होंने कहा कि हम छात्रों की छोटी -छोटी समस्याओं के लिए भी प्रशासन के साथ बिना किसी बात की परवाह किए लड़ने -मरने को तैयार हो जाते थे। उस समय किसी छात्र से पूरा किराया लेने की बस वाले की मजाल नहीं थी।
पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष विपुल अग्रवाल ने कहा कि उस समय छात्र राजनीति का वो समय था जब छात्रसंघ चुनाव आते ही सिर्फ कॉलेज ही नहीं बल्कि पूरे शहर में उत्सव जैसा माहौल बन जाता था। छात्रसंघ चुनाव सिर्फ एक वोटिंग प्रक्रिया नहीं थी बल्कि भविष्य के नेताओं को सीमित साधन और असीमित जोश के साथ गढ़ने वाली एक मजबूत पाठशाला थी।
विपुल अग्रवाल ने सन् 2003 के एक छात्र आंदोलन का किस्सा बताते हुए कहा कि कॉलेज के दो छात्र नेता छात्रसंघ चुनाव की तिथि में परिवर्तन करने की मांग को लेकर कॉलेज के ही एक कमरे में जहर की पुड़िया लेकर घुस गए और खुद को कमरे में बंद कर लिया। उस समय राधा रतूड़ी जिलाधिकारी थी। कॉलेज में पूरी रात छात्र-छात्राओं का जमावाड़ा लगा रहा। डीएम राधा रतूड़ी जी आधी रात को ही लगभग 12 बजे मुझसे बात करना चाहतीं थीं क्योंकि उस समय मैं ही छात्रसंघ अध्यक्ष था। लेकिन मैंने विकासनगर के थानाध्यक्ष को डीएम से बात करने से साफ मना कर दिया। जिसके बाद थानाध्यक्ष ने अपनी टोपी मेरे पैरों पर रखते हुए डीएम से बात करने का निवेदन किया। जिसके बाद आधी रात को 2 बजे वायरलेस मैसेज के आधार पर लिखित आदेश के बाद छात्रों की मांग पूरी हुई।
विपुल अग्रवाल ने एक बार का किस्सा बताया कि जब वह छात्रसंघ अध्यक्ष भी नहीं बनें थे और विद्यार्थी परिषद के जिला प्रमुख थे तब उन्होंने सन् 2001 में किसी कार्यक्रम में विकासनगर आये प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री स्वर्गीय नित्यानंद स्वामी जी के कार्यक्रम में मंच पर पहुंचकर डाकपत्थर महाविद्यालय में कला एवं विज्ञान संकाय की कक्षाएं प्रारंभ करवाने की मांग को लेकर उनका भाषण देते हुए माइक पकड़ लिया था जिसके बाद उसी समय मुख्यमंत्री ने एक सप्ताह में कला एवं विज्ञान संकाय की कक्षाएं प्रारंभ करने की घोषणा की।
उन्होंने बताया कि छात्रसंघ अध्यक्ष बनने के बाद 2002 में जब प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी उसके बावजूद भी उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री स्वर्गीय नारायण दत्त तिवारी जी से डाकपत्थर डिग्री कॉलेज के लिए डाकपत्थर बैराज के पास भूमि आवंटित करवायी जिसके बाद ही कॉलेज की अपनी बिल्डिंग बन सकी।
विपुल अग्रवाल ने बताया कि उन्होंने ही प्रथम बार छात्रसंघ सप्ताह कार्यक्रम प्रारंभ करवाया तथा कालिंदी नामक कॉलेज की मैगजीन प्रारंभ करवाई।
उन्होंने कहा कि उस समय की छात्र राजनीति में दबंगई जरूर थी लेकिन छात्रों में आपसी एकता और दूसरे दलों के साथ भी भाईचारा था लेकिन वर्तमान समय में वह भाईचारा और एकता समाप्त होती जा रही है तथा छात्रों में नशा प्रवृत्ति भी बढ़ती जा रही है यह भविष्य के लिए एक चिंता का विषय है।
