


देहरादून। बैंक कर्मचारियों की ओर से सोमवार से तीन दिवसीय हड़ताल का आह्वान किया गया है। हालांकि कर्मचारियों का कहना है कि इस हड़ताल से उन्हें किसी तरह का लाभ नहीं होने वाला, बल्कि इसका सीधा नुकसान कर्मचारियों को ही उठाना पड़ेगा। हड़ताल के दौरान बैंक कर्मचारी शाखाओं में अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे, लेकिन कामकाज पूरी तरह प्रभावित रहेगा।
कर्मचारियों का कहना है कि सप्ताह में मिलने वाला रविवार उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। इस दिन वे अपने बच्चों और परिवार के साथ समय बिताने के अलावा कई जरूरी व्यक्तिगत कार्य भी करते हैं। इस बार 27 सितंबर को रविवार होने के बावजूद बैंक पूरे दिन खुले रहने के कारण कर्मचारियों को यह साप्ताहिक अवकाश भी नहीं मिल पाएगा।
कर्मचारियों के मुताबिक, तीन दिन बैंक बंद रहने के बावजूद हड़ताल पर रहने वाले कर्मचारियों की छुट्टी नहीं मानी जाएगी। हड़ताल में शामिल होने पर जितने दिनों का कार्य प्रभावित होगा, उतने दिनों की वेतन कटौती भी कर्मचारियों को झेलनी पड़ेगी। ऐसे में कर्मचारियों का कहना है कि हड़ताल पर जाना उनके लिए किसी लाभ का नहीं, बल्कि आर्थिक नुकसान का कारण बन रहा है।
बैंक कर्मचारियों ने कहा कि हड़ताल पर जाना उनकी मजबूरी है। उनका कहना है कि सरकार की ओर से बैंक शाखाओं में पॉलिसी विक्रेताओं को बैठाए जाने से बैंक कर्मचारियों के नियमित कार्य और कामकाज की व्यवस्था पर भी असर पड़ रहा है। कर्मचारियों का आरोप है कि इससे उनकी कार्यप्रणाली प्रभावित हो रही है और इसी मुद्दे को लेकर वे अपनी आवाज उठाने के लिए हड़ताल का रास्ता अपनाने को मजबूर हैं।
कर्मचारियों का कहना है कि “हड़ताल पर जाना हमारा भी नुकसान है, क्योंकि हड़ताल के दौरान जितने दिन काम बंद रहेगा, उतने दिनों की सैलरी भी काटी जाएगी। इसके बावजूद अपनी मांगों और समस्याओं को लेकर आवाज उठाना जरूरी हो गया है।”
बैंक कर्मचारियों ने कहा कि हड़ताल का उद्देश्य आम जनता को परेशान करना नहीं है, बल्कि अपनी समस्याओं और कार्यस्थल से जुड़े मुद्दों की ओर सरकार और संबंधित अधिकारियों का ध्यान आकर्षित करना है।
