
उत्तराखंड की बहन बेटियों को चारित्रिक रूप से पतित करने के लिए चीन का टेंगो ऐप विशेष पहल कर रहा है हालांकि यह काम पूरे देश में हो रहा है लेकिन देवभूमि में जिस तरह बहन बेटियों और मांओं को अर्थ कमाने का लालच देकर अंग प्रदर्शन के लिए उकसाया जा रहा है और तमाम बहन बेटियां इसके झांसे में आ रही है यह दुर्भाग्यपूर्ण है। एक ओर नौकरी करने वाली बहन बेटियां मात्र हजारों की कमाई कर रही है और टेंगो ऐप के माध्यम से घर बैठकर अंग प्रदर्शन कर उसके झांसे में आई महिलाएं हजारों से लेकर लाखों तक कमा रही है जिससे सेवायोजित मातृ शक्ति में भी अधिक कमाने होड़ लग रही है जो दुर्भाग्यपूर्ण है। इस संदर्भ में एक दर्जन लोग जो इस व्यवस्था के शिकार हुए हैं और लोक लाज के कारण अपना नाम भी नहीं बताना चाहते लेकिन इतने परेशान है कि एक दो परिवारों ने अपने मकान तक बेचकर महिलाओं से मोबाइल छीन लिए ओर दूसरी जगह चले गए। इसका कारण मातृ शक्ति का टेंगो ऐप तथा अन्य झांसे में आना है जो लगातार समस्या पैदा कर रहे हैं। हम सब अपने परिवारों को सुखी सम्पन्न रखने का प्रयास करते हैं लेकिन टेंगो ऐप के माध्यम से अश्लील हरकतें कर यह महिलाएं उसके पैसों की लती हो गए हैं। इतना ही नहीं कई महिलाएं तो चारित्रिक पतन की वृत्ति अपनाने लग रही है। प्राय: हर महिलाओं और पुरूष के पास एंडराइड फोन है जिन पर कई ऐप आते हैं। टेंगों में भी इन्हीं ऐप में से एक है जो समस्या का कारण बन रहा है। कुछ अन्य ऐप भी चारित्रिक पतन को बढ़ावा दे रहे हैं।
भुक्त भोगियोंं का कहना है कि टेंगो नाम का यह ऐप प्ले स्टोर से डाउनलोड कराया जाता है। इसके लिए कुछ महिलाएं एजेंट के रूप में काम करती है जो दूसरी महिलाओं को बताती है और उन्हें इसकी लती बनाती है जिसके कारण उनका चारित्रिक पतन हो रहा है। कोरोना काल में उद्योग धंधे बंद हो जाने के बाद चीन ने यह घटिया चालकर भारतीय परिवारों को नष्ट करने का एक कुकृत्य किया है। महिलाओं को एजेंसी तथा ऐजेंटों द्वारा बरगलाया जाता है जिसके कारण बहू बेटियां अर्थ अर्जन के कारण इस ऐप की लती हो जाती है और पैसा कमाने लग जाती है। यह दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति अन्य प्रदेशों में भी होगी लेकिन उत्तराखंड में कुछ क्षेत्रों में इसका प्रभाव ज्यादा है। ऐसे कई लोग टेंगो ऐप पर सक्रिय है जो पैसे खाते में डालकर पहले महिलाओं का विश्वास जीतते हैं। कई बार तो यह महिलाएं अपने घरों से निकल कर ऐसे लोगों का शिकार हो रही है जो उन्हें वैश्यावृत्ति का शिकार बना रहे हैं या मानव अंग तस्करों को बेच दे रहे हैं। इन लोगों का कहना है कि टेंगो ऐप पर अलग-अलग नामों से आईडी बनाकर परिवारों को बर्बाद किया जा रहा है जो देवभूमि के लिए काफी दुखद है।
इसी संदर्भ में सनातन संस्कृति रील्स हिन्दू भारत नामक संस्था द्वारा विशेष प्रयास किया जा रहा है। संस्था द्वारा बैनर और पोस्टर द्वारा लोगों को जागरूक करने का काम किया जा रहा है ताकि लोगों के परिवार न टूटेंं। आपके परिवार को तबाह कर रहा है टेंगों ऐप नामक पोस्टर और बैनर के माध्यम से संस्था द्वारा जनता जागरूक किया जा रहा है। इस संस्था के पदाधिकारियों का कहना है कि वह लोगों को जागरूक करने का काम कर रहे हैं। पित्थूवाला निवासी सुबोध पोखरियाल का कहना है कि टेंगों के साथ ही साथ चमेट और क्वैक क्वैक जैसे अन्य ऐप भी इसी तरह का काम कर रहे हैं जो महिलाओं को कमाई का लालच देकर वैश्यावृत्ति के धंधे तक धकेल रहे हैं जिससे परिवार टूट रहे हैं। सुबोध पोखरियाल ने कहा है कि देव संस्कृति के लिए इस तरह के ऐप हानिकारक है और परिवारों को बर्बाद करने का काम कर रहे हैं। सुबोध पोखरियाल ने सरकार से आग्रह किया है कि इस तरह के ऐप पर कड़ी नजर रखी जाए और उन्हें बंद कराया जाए ताकि उनसे देवभूमि की संस्कृति को विकृत होने से बचाया जाए।
इसी संदर्भ में रोहित कुमार का कहना है कि टेंगो जैसे कई ऐप महिलाओं और लड़कियों को बर्बाद कर रहे है जिसके कारण परिवार टूट रहे हैं। रोहित कुमार का कहना है कि इस व्यवस्था को सुधारना ही होगा। नया गांव देहरादून निवासी युवा रोहित कुमार मानते हैं कि महिलाएं टेंगो ऐप के कारण धीरे-धीरे चारित्रिक रूप से पतित होने की ओर बढ़ रही है। उन्होंने इसके कई प्रमाण भी बताए तथा कहा कि कई परिवारों की महिलाओं के साथ-साथ शिक्षा प्राप्त कर रही युवतियां भी इस टेंगो ऐप का शिकार हो रही है। रोहित कुमार पुत्र महिपाल अपना व्यवसाय करते हैं लेकिन टेंगो के मामले पर खुल कर बोलते हैं। उनका कहना है कि शासन प्रशासन को इस ऐप पर प्रतिबंद लगाना चाहिए जिसके कारण देवभूमि की महिलाओं का चारित्रिक पतन बढ़ रहा है। इसी तरह एक दर्जन अन्य लोग भी मिले जो अपना नाम नहीं देना चाहते पर उनका मानना है कि टेंंगो ऐप के साथ-साथ कई ऐप ऐसे हैं जो महिलाओं को अंग प्रदर्शन के बदले आर्थिक राशि देते हैं। धीरे-धीरे यह महिलाएं पतन की ओर बढ़ती है। ऐसे कई परिवार है जो टूटने की कगार पर है। कुछ परिवार तो टूट चुके हैं लेकिन सामाजिक व्यवस्थाओं के कारण वह इस मामले पर मौन चुप्पी साधे हुए हैं। लगभग एक दर्जन परिवारों से इस संदर्भ में चर्चा हुई जिसका मुखर रूप से कहना है कि चीन के टेंगो ऐप के साथ-साथ कई ऐप ऐसे हैं जिन्हें बंद होना चाहिए। इससे महिलाओं का चारित्रिक पतन रूकेगा। इस संदर्भ में प्रशासनिक अधिकारियों से चर्चा करने का प्रयास किया गया लेकिन उनका कहना था कि इन ऐप पर ऊंचे स्तर से ही प्रतिबंद लग सकता है। वे इस संदर्भ में फिलहाल कुछ नहीं कर सकते हैं।





