
बी डी सी चुनाव में उतरे जालप चौहान, लेकिन पत्रकार के सवाल पर बोले – ‘अभी मेरे पास टाइम नहीं है’!
[जिला, देहरादून धर्मावल ]
जहाँ एक ओर पंचायत और ब्लॉक स्तर पर चुनावी गर्मी तेज़ हो चुकी है, वहीं दूसरी ओर जालप चौहान का BDC चुनाव में उतरना चर्चा का बड़ा विषय बना हुआ है। लेकिन उनकी एक प्रतिक्रिया ने अब कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
सूत्रों के अनुसार जब एक पत्रकार ने जालप चौहान से फोन पर संपर्क कर उनसे चुनाव और जनता से जुड़ी योजनाओं के बारे में पूछना चाहा, तो उनका जवाब था –
“अभी मेरे पास टाइम नहीं है।”
अब सवाल उठता है कि अगर आज, जब जनता उन्हें जानना चाहती है, तब उनके पास समय नहीं है, तो चुनाव जीतने के बाद क्या जनता की समस्याओं पर भी यही जवाब मिलेगा?
क्या जालप चौहान वही नेता साबित होंगे, जो चुनाव जीतने के बाद ‘बिजी’ हो जाते हैं और जनता लाइन में लगकर भी ‘टाइम’ मांगती रह जाती है?
❗ जनता का सवाल – “अगर आज समय नहीं है, तो कल भरोसा कैसे करेंगे?”
गाँव की गलियों में चर्चा गर्म है। लोगों का कहना है कि नेता बनने का सपना देखना गलत नहीं है, लेकिन नेता वही जो जनता से जुड़ सके, उनकी बात सुने, और समस्याओं के लिए ‘टाइम’ निकाल सके।
🔍 चुनावी मैदान में जालप चौहान के दावे, लेकिन संवाद का अभाव
जालप चौहान ने हालांकि अभी तक कोई स्पष्ट चुनावी घोषणा या विजन साझा नहीं किया है। संवाद से बचना, या पत्रकारों को टालना – यह संकेत देता है कि या तो रणनीति अधूरी है, या फिर जनता को हल्के में लिया जा रहा है।
📣 सोशल मीडिया पर भी उठे सवाल
“#NoTimeForPublic” ट्रेंड कर रहा है, जहाँ यूजर्स पूछ रहे हैं –
“अगर आज पत्रकार को ‘टाइम नहीं’, तो कल जनता को क्या मिलेगा?”
🗣️ जनता की आवाज बनें, जवाब से न भागें जालप चौहान जी!
नेता वही होता है जो जनता के सवालों का सामना कर सके, संवाद करे, और हर मुद्दे पर खड़ा हो।
अगर आज सवालों से भागेंगे, तो कल कुर्सी से भी भरोसा उठ जाएगा।





