
शिवालिक एकेडमी में आयोजित जाय ऑफ गिविंग सप्ताह की शुरुआत कक्षाओं में प्रेरणादायक वीडियो दिखाने से हुई। इन वीडियो में यह संदेश दिया गया कि दान सिर्फ भौतिक वस्तुओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समय, प्रेम, और सहानुभूति का भी हो सकता है। वीडियो में उन बच्चों की कहानियाँ दिखाई गईं, जिन्होंने दूसरों की मदद करके खुशी महसूस की। बच्चों ने इन वीडियो को देखकर सीखा कि छोटी-छोटी मदद भी किसी के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकती है। इसी क्रम में विशेष प्रार्थना सभा का आयोजन किया जिसमे विशेष प्रार्थना सभा में बच्चों ने प्रभावशाली नाटक
प्रस्तुत किया, इस नाटक ने बच्चों को यह समझाया कि दान करने से न सिर्फ दूसरों की मदद होती है, बल्कि हमें भी आत्मिक खुशी मिलती है।इसके तहत प्रार्थना सभा में शिक्षकों ने “दान का महत्व” विषय पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने बताया कि दान से समाज में समानता और सद्भाव बढ़ता है तथा बताया कि, “दान का मतलब सिर्फ वस्त्र, पैसा या खाना देना नहीं है; किसी की परेशानी समझना और उसकी मदद करना भी एक दान है।” इन प्रेरणादायक शब्दों ने सभी को सोचने पर मजबूर कर दिया।
पूरे सप्ताह बच्चों ने जरूरतमंदों के लिए कपड़े, किताबें, खिलौने और अन्य सामान इकट्ठा किया तथा जब यह सामान उन्होंने अनाथालय और झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले बच्चों को दिया, तो उनके चेहरों पर खुशी देखते ही बनती थी। दान देने के पश्चात बच्चों ने अपने अनुभव भी साझा किए जिसमें एक बच्चे ने अनुभव साझा करते हुए कहा, “दान करने से मुझे अहसास हुआ कि खुशी सिर्फ पाने में नहीं, बल्कि देने में भी होती है।”
इस पूरे सप्ताह ने बच्चों को सिखाया कि दान करना सिर्फ जरूरतमंदों की मदद करना नहीं है, बल्कि यह खुद को भी खुश और संतुष्ट करने का सबसे अच्छा तरीका है। जाय ऑफ गिविंग सप्ताह में विद्यार्थियों के साथ ही कई शिक्षकों जिसमें हिमानी बिष्ट, ललित धीमान, समीर खान, शम्मी चौहान ने अपना योगदान दिया।








