
हजारों लोग प्रतिदिन पहुंचते हैं वाघा बॉर्डर हिंदुस्तान-पाकिस्तान बॉर्डर पर हर शाम होने वाली परेड में हर हिंदुस्तानी के अंदर अपने देश के लिए कुछ करने सोच उत्पन्न होती है बीएसएफ बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स बॉर्डर पर होने वाले अपराधों पर अंकुश लगाने में अपना अहम योगदान देती है 2017 में भारत ने सबसे पहले वाघा बॉर्डर पर लाइन ऑफ कंट्रोल से 500 मीटर पहले 360 फुट लंबा पुल लगाकर भारत का झंडा फहराने में अपना अहम योगदान दिया यह झंडा 2 किलोमीटर दूर से आपको दिखाई दे जाएगा 1999 मैं मई लेकर जुलाई तक चले कारगिल युद्ध के दौरान भी सीमा सुरक्षा बल ने पर्वतों की चोटियों पर आर्मी के साथ सामंजस्य दिखाते हुए देश की सुरक्षा में अपना अहम योगदान दिया बीएसएफ की स्थापना 1965 में हुई थी पाकिस्तान द्वारा हमेशा हमारी योजनाओं को विफल करने का प्रयास होता रहा मगर पाकिस्तान के लाख कोशिशों के बाद भी सीमा सुरक्षा बल ने जम्मू एवं कश्मीर सीमा पर तारबंदी लगाने का कार्य सफलतापूर्वक किया कई बाहर से आने वाले लोग वाघा बॉर्डर को अटारी बॉर्डर के नाम से भी पुकारते हैं मगर हम आपको बताते चलें कि अटारी बॉर्डर नहीं है अटारी हिंदुस्तान का अमृतसर जिले में आखिरी गांव है


