
महाकुंभ के सबसे बड़े अमृत स्नान मैं देश ही नहीं अन्य कई विदेश से भी आए श्रद्धालुओं ने त्रिवेणी संगम पर डुबकी लगाई इस महाकुंभ में चार रूपों में ग्रहों की स्थितियां महायोग बना है बुधादित्य योग के साथ सर्व सिद्धि योग मैं पुण्य की डुबकी लगाने वालों की संख्या 64 करोड़ से पर होना अपने आप में एक विश्व रिकॉर्ड बना है चंद्रमा और सूर्य दोनों ग्रहों की एक साथ युति मकर राशि में होगी एक साथ गुरु भी वूषभ राशि में गोचर करते रहेंगे इसके अलावा बिगड़े कार्य बनाने वाला बुधादित्य योग के साथ ही सिद्धि योग भी बना है इस योग में किए गए कार्य सफल और सिद्ध होंगे अन्य फल के अलावा मनपसंद वस्तुओं का दान करने से कई गुना लाभ मिलता है जिसने भी इस महाकुंभ में डुबकी लगाई उसे पर सब ग्रहों का आशीर्वाद बना है जानकार बताते हैं कि अमृत कलश को लेकर राक्षसों और देवताओं में संघर्ष हुआ कलश में से चार बुंद नासिक हरिद्वार उज्जैन और तीर्थो के राजा प्रयागराज यह संघर्ष 12 दिन तक चलता रहा जिसे 12 साल के बराबर माना जाता है चंद्र देव सूर्य देव शनि देव बृहस्पति देव यह है सब 143 वर्ष बाद एक में लाइन करने के उपरांत 144 वें वर्ष में प्रवेश करते हैं तब यह योग बनता है और महाकुंभ मेले का आयोजन होता है इसमें सबसे पहले नागा साधुओं के स्नान के उपरांत ही आमजन को स्नान की अनुभूति होती है ऐसा जानकार बताते हैं










