
गुरु हरराय साहब की यह पंक्तियां समाजसेवियों पर पूरी तरह चरितार्थ होती है। ऐसे समाजसेवियों का यत्र तत्र सर्वत्र सम्मान होता है जो निरंतर सेवा कार्य में लगे रहते हैं। ऐसे ही लोगों में एक नाम शामिल है सरदार हरिओम सिंह का, जो जसपुर निवासी हैं और समाजसेवा में लगातार आगे रहते हैं। संस्था कोई भी हो समाजसेवा में सरदार हरिओम सिंह का नाम आगे रहता है। चाहे उत्तरांचल महासभा हो, रेड क्रॉस सोसायटी हो या अन्य सामाजिक संस्थाएं जहां रक्तदान से लेकर समाज को स्वस्थ और स्वच्छ बनाने के लिए कोई भी प्रयोजन आयोजित किया जाता है उसमें सरदार हरिओम सिंह सबसे आगे खड़े मिलते हैं।
सिख पंथ विशेषकर पंजाब समाज के लिए लोहड़ी पर्व काफी महत्वपूर्ण होता है। ऐसे अवसर पर निर्धन कन्याओं का विवाह बड़ा पूण्य का काम माना जाता है। सरदार हरिओम सिंह है ऐसे ही समाजसेवियों में है जो लोहड़ी पर तमाम निर्धन कन्याओं के परिणय संस्कार को संपादित करा चुके हैं। यह बात अलग है कि इसके लिए वह समाज, अपने सहयोगियों का भरपूर समर्थन प्राप्त करते हैं। एक जन प्रतिनिधि में जो गुण होने चाहिए वह सरदार हरिओम सिंह के भीतर कूट-कूटकर भरा हुआ है। बाजार से उनका निकलना और जनता द्वारा उन्हें समुचित सम्मान दिया जाना इस बात का संकेत है कि जनता के लोग उन्हें अपना परिजन सा मानते हैं। जैसे कोई उनके घर का व्यक्ति जा रहा हो, उसे सम्मानित करना, बुलाकर चाय पानी पिलाना और हर तरह का यथोचित सम्मान देना जनता की ओर से उन्हें औरों से अलग बनाने वाला है। यह उनके गुणों और कार्यों का परिचायक है। लोगों में से है जो किसी भी सुख और दुख के अवसर पर जनता के साथ खड़े मिलते हैं और उनके सुख दुख को बांटने का है, ऐसे व्यक्ति का है जो जनता की अपेक्षाओं को पूर्ण करने के लिए तन मन धन सब न्यौछावर करने वाले हैं। ऐसे ही
सरदार हरिओम सिंह उनप्रयास करते हैं। यह गुण एक समाज सेवी का तो न्यौछावर के कारण जनता उन्हें परिजन मानती हैं।
व्यापारियों के अवाज उठाना उनकी प्रकृति में शामिल है। इसे सुयोग ही कहेंगे कि उन्हें प्रांतीय उद्योग व्यापार मंडल जसपुर का क्षेत्रीय अध्यक्ष बनाया गया है, वह भी निर्विरोध। ऐसा अवसर कम आता है जब अध्यक्ष बनने के लिए और लोग सामने न आएं लेकिन सरदार हरिओम सिंह की कार्य क्षमता, कार्य शैली और जनता के प्रति जुड़ाव है कि जनता उनके अलावा किसी और को इस पद से सम्मानित नहीं करना चाहती। यह विशिष्टता और विलक्ष्णता सरदार हरिओम सिंह की है जिसे उन्होंने अपने आचरण में ढाल लिया है। मूलतः कपड़े के व्यवसायी सरदार हरिओम सिंह जसपुर में अपने व्यवसाय के कारण कम, व्यवहार कारण अधिक जाने जाते हैं। यही व्यवहार उन्हें जनता के दिलों में राज करने वाला बना रहा है। सरदार हरिओम सिंह के प्रेरक व्यक्तित्व से तमाम लोग प्रेरणा भी ले रहे हैं और लोगों को लगता है कि इनके जैसा बनकर वह समाज में नेम और फेम दोनों प्राप्त करेंगे। यह सफलता कम ही लोगों को मिलती है लेकिन जनसेवा विशिष्ट गुणों के कारण सरदार हरिओम सिंह क्षेत्र की जनता के सिरमौर बने हुए




