

पेड़ बचाओ-जीवन बचाओ
हरेला के उपलक्ष्य में “पेड़ बचाओ-जीवन बचाओ” नामक नुक्कड़ नाटक किया गया!
इस नाटक द्वारा सभी उपस्थित लोगों को संदेश दिया गया कि किस तरह हम सीमित संसाधनों का अंधाधुंध दुरूपयोग कर रहे है। नाटक में पुराने दौर और आज के दौर के बारे में दिखाया गया है कि कैसे पहले हमें पेड़ों की छाँव मिला करती थी,किस प्रकार हम सावन में झूले लगाया करते थे, कैसे हमारी पतंग पेड़ों में फँस ज़ाया करती थी, कैसे हम पेड़ पर ही विकेट बना कर क्रिकेट खेला करते थे, परंतु आज पेड़ो के कटाव के कारण यह सब एक सपने की तरह लगने लगा है।विकास के नाम पर पेड़ों का अंधाधुंध कटान हमारे जीवन को संकट में डाल रहा है!
नाटक यही संदेश देता है कि अभी भी देर नहीं हुई है, अभी भी हम वृक्षारोपण कर आने वाली पीढ़ी का भविष्य उज्ज्वल कर सकते है! चिराग थापा की अध्यक्षता में किए गए नाटक को विद्यार्थियों द्वारा सेलाकुई इंडस्ट्रियल एरिया, दुर्गा कॉम्प्लेक्स,सेलाकुई, भाऊवाला चौक आदि स्थानों पर प्रदर्शित किया गया।





