


60 देशों के साहित्यकारों की सहभागिता वाले अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक महोत्सव में हुए शामिल, डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने दीं भविष्य के लिए शुभकामनाएँ
देहरादून/रुद्रप्रयाग, 27 अक्टूबर 2026। उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जनपद के युवा लेखक एवं कवि सतपाल ने मंगलवार को देहरादून के थानो स्थित लेखक गाँव में आयोजित अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक महोत्सव में सहभागिता की। इस अवसर पर पतंजलि योगपीठ के संस्थापक योगगुरु बाबा रामदेव जी से उनकी आत्मीय भेंट हुई। सतपाल ने अपनी पुस्तक ‘पूरा केदार दर्शन’ बाबा रामदेव जी को श्रद्धाभाव के साथ भेंट की, जिसे उन्होंने स्वीकार करते हुए लेखक को आशीर्वाद प्रदान किया। इसके साथ ही भारत सरकार के पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री, उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री, प्रख्यात लेखक, कवि एवं राजनीतिज्ञ डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ जी से भी उनकी मुलाकात हुई। डॉ. निशंक ने युवा लेखक सतपाल को साहित्यिक क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए भविष्य की शुभकामनाएँ प्रदान कीं। लेखक गाँव की निदेशक विदुषी निशंक के प्रति भी सतपाल ने आभार व्यक्त किया। 25 अक्टूबर से आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक महोत्सव में 60 देशों से आए साहित्यकारों की सहभागिता रही। कार्यक्रम में विभिन्न देशों के साहित्यकारों को सम्मानित किया गया तथा अनेक पुस्तकों का विमोचन भी हुआ। साहित्य, संस्कृति, भारतीय ज्ञान परंपरा और रचनात्मक अभिव्यक्ति को समर्पित इस आयोजन में देश-विदेश के साहित्यकारों, कवियों, शिक्षाविदों और संस्कृति से जुड़े लोगों को विचारों के आदान-प्रदान का अवसर मिला। इस अवसर पर अपनी पुस्तक ‘पूरा केदार दर्शन’ भेंट करना सतपाल के लिए विशेष उपलब्धि रही। रुद्रप्रयाग जनपद की धार्मिक, सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक विरासत को व्यापक पहचान दिलाने के उद्देश्य से तैयार की गई यह पुस्तक केदारनाथ सहित जनपद के प्रमुख धार्मिक स्थलों, मंदिरों, तीर्थयात्रा मार्गों और पर्यटन की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण स्थानों से संबंधित उपयोगी जानकारी प्रस्तुत करती है। लेखक सतपाल का कहना है कि उनकी पुस्तक का उद्देश्य श्रद्धालुओं, पर्यटकों और नई पीढ़ी को उत्तराखंड की समृद्ध आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराना है। बाबा रामदेव जी द्वारा पुस्तक को स्वीकार कर आशीर्वाद प्रदान करना तथा डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ जी से भविष्य के लिए शुभकामनाएँ प्राप्त होना उनके लिए अविस्मरणीय अनुभव है। हिंदी के साथ गढ़वाली भाषा और स्थानीय संस्कृति को प्रोत्साहित करने के लिए प्रयासरत युवा लेखक सतपाल ने कहा कि वरिष्ठ साहित्यकारों और समाज के प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों का मार्गदर्शन साहित्यिक यात्रा को नई ऊर्जा प्रदान करता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि वे भविष्य में भी उत्तराखंड की धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहर को साहित्य के माध्यम से जन-जन तक पहुँचाने तथा हिंदी एवं गढ़वाली साहित्य के विकास के लिए निरंतर कार्य करते रहेंगे।
